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जून, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सावन की फुहार...

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सावन में साजन हाथ लगाऊं, भरी-भरी मेंहदी हाथों में.! हरी-हरी चूड़ी कांच की पहनूं, भरी-भरी पहनूं बांहो में.! धानी चुनर ओढ़ के सजना, तुझे रिझाऊं सावन मैं.! खनकाऊं मैं कांच की चूड़ी, आऊं ना तेरी बांहों में.! दौड़ के तूने मुझको पकड़ा, झूला लिया मुझे बांहों में.! अंग से अंग लगा के सजना, भीगा दिया मुझे सावन में.! #अजय57

दहलीज़...

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बेड़ियां समाज की, पैरों में बंध गई है.! संस्कार मिली है जो, वो राह रोक रही है.! मर्यादा की दीवारें, है सामने खड़ी.! कैसे करुं मैं पार, दहलीज़ अपने घर की.? खानदान की हूं इज़्जत, कर पाऊंगी न पार.! पगड़ी उतर जाएगी, मेरे माँ-बाप के सर से.! दहलीज़ के ही अंदर, महफूज़ मेरी इज़्जत.! गर कर गई मैं पार, खाक़ हो जाएगी इज़्जत.! इज्ज़त जुड़ी है मुझसे, मैं हीं हूं घर की इज़्जत.! मैं बेटी बन के जन्मी, बेटा नही बन पाई.! #अजय57 
https://twitter.com/Payal_Rohatgi/status/1141528640628248576?s=09

जिंदगी किताब है...

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जिंदगी ख़ुद ही #किताब है, फ़ुर्सत में कभी पढ़ना.! हर पन्ने को पलट कर देखना, कुछ ना कुछ निकलेगा.! किसी में तुमको दर्द मिलेगा, किसी में होगा प्यार.! कहीं जीवन से चाहत होगी, कहीं होगा बैराग.! जीवन-पथ पर चलते-चलते, क्या खोया क्या पाया है.! हाथ फैलाकर ज़रा देखना, मुट्ठी में क्या आया है.! #अजय57

चरित्र...

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हम #चरित्र की बातें करते, बेमानी सब लगता है.! बातों पर कौन खरा उतरता, कम ही ऐसे मिलते है.! हर चरित्र दोहरा है दिखता, कहता कुछ और करता कुछ.! स्वार्थ में अंधा हर एक मिलता, पैसे पर बिक जाता है.! जैसे पैसा ईमान धरम हो, पैसा ही बस जीवन है.! पैसे की ही ख़ातिर हम सब, ज़मीर तक को बेच दिए.! #अजय57

Father's Day

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उनसे ही है #वज़ूद मेरा, उनकी ही परछाईं हूं... मेरी भी अब शक्ल पापा, आपसे मिलने लगी है... कद काठी में आपके जैसा, थोड़ा सा मैं लम्बा हूं... बाल को मैं भी रंगता हूं, जैसे आप रंगते थे... सोंच मेरी भी वही हो गई, जैसे आप सोचते थे... पहले लगता आप गलत है, अब लगता है सही थे... आज नही आप साथ में मेरे, फिर भी यादें साथ है... आपके ही पदचिन्हों पर, चलने की कोशिश करता हूँ... #अजय57

एकता... UNITY

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टुकड़ो में बंटकर हम, हो गए कमज़ोर है... जाति धर्म ऊंच नीच का, फैला यहां सम्राज्य है... हो गए कमज़ोर हम है, देश सवाल पर... कोई हिन्दू कोई मुस्लिम, सिक्ख कोई ईसाई है... जाति मज़हब में बंटे है, #एकता नही हम में है... हम सभी है देश की मिट्टी, देश सबसे पहले है... है मेरी पहचान भारत, बस यही एक सच है... #अजय57

एकता...

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#एकता में ताक़त इतनी, हील जाती सल्तनत है.! हो पुरानी कितनी भी, सरकार बदल जाती है.! अंग्रेजों की सत्ता को, समाप्त किए थे मिलकर हम.! सत्तर साल पुरानी सत्ता, उखाड़ फेके भारत के लोग.! जब भी हमसब एक हुए, रुख हवा की हमने बदली है.! हमनें ही इतिहास रचा है, जब भी हमसब एक हुए.! #अजय57

नाराज़गी...

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ख़ामोशी तेरी सहन न होती, गुमसुम सी क्यों बैठी हो.! ख़ता हुई है मुझसे क्या, जुदा जुदा क्यों बैठी हो.! आओ पास करें हम बातें, बातों से ही हल निकलेगा.! गिले शिकवे जो भी होगा, मिलकर हम सुलझा लेंगे.! #अजय57

आज भी है याद ताजा...

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ज़ेहन में आज भी #एक_याद_ताज़ा_है.! लमहा गुज़र गया है पर याद ताज़ा है.! यादों में आज भी वो चलचित्र सी है चलती.! गुज़रा हुआ वो लमहा लगता है बात कल की.! हम इश्क़ में थे उनके कुछ इस तरह डूबे से.! हाथों से उनका हाथ कब हाथ से छूटे थे.! तनहा सी जिंदगी को तनहा ही जी रहा हूं.! यादों में मगर मेरे वो साथ जी रहीं है.! #अजय57