नाराज़गी...

ख़ामोशी तेरी सहन न होती,
गुमसुम सी क्यों बैठी हो.!
ख़ता हुई है मुझसे क्या,
जुदा जुदा क्यों बैठी हो.!
आओ पास करें हम बातें,
बातों से ही हल निकलेगा.!
गिले शिकवे जो भी होगा,
मिलकर हम सुलझा लेंगे.!
#अजय57

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