मज़दूर..
जिंदगी तुमनें दिया है दर्द ज़्यादा, देख फिर भी मैं हूं जिंदा यहां.. टूटना सीखा नही किसी हाल में, क्यों कि मैं हूं टूटकर के ही बना.. आशियां अपना नही कोई यहां, यह ज़मी और आसमां अपना ज़हां.. हम ज़मी को जोतकर उपजाते अन्न, पर हमी भूखे और नंगा यहां.. ईंट पत्थर से बनाते घर यहां, पर हमें मिलता नही है छत यहां.. हम नही कभी टूटते किसी हाल में, हम ज़मी से जुड़े है इंसा यहां.. #अजय57