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फ़रवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मज़दूर..

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जिंदगी तुमनें दिया है दर्द ज़्यादा, देख फिर भी मैं हूं जिंदा यहां.. टूटना सीखा नही किसी हाल में, क्यों कि मैं हूं टूटकर के ही बना.. आशियां अपना नही कोई यहां, यह ज़मी और आसमां अपना ज़हां.. हम ज़मी को जोतकर उपजाते अन्न, पर हमी भूखे और नंगा यहां.. ईंट पत्थर से बनाते घर यहां, पर हमें मिलता नही है छत यहां.. हम नही कभी टूटते किसी हाल में, हम ज़मी से जुड़े है इंसा यहां.. #अजय57

कण-कण में कृष्ण

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कण कण में जहां कृष्ण बसे है, हर दिल में बसे है राम.! हर पत्थर जहां शिव बन जाता, नदियां होती धाम.! पर्वत पिता सा साहस देता, सागर देता विश्वास.! जन्मभूमि जहां पूजी जाती, भारत होती माँ.! संस्कार जहां पलते फूलते, ऐसा देश महान.! नमन मुझे उस धरती को, जन्म जहां ले बारम्बार.! #अजय57