संदेश

कोलाहल

चित्र
मौन हूं मैं मन से लेकिन, अंदर में कोलाहल है.. तुम खड़ी हो सामने, फिर भी ये मन क्यों व्याकुल है.. चाहता है मन मेरा क्या, किसकी इसको तलाश है.. गर अगर मिल जाए वो तो, रहता फिर भी हताश क्यों.. क्यों नही होता है सब्र, बढ़ती क्यों जाए चाहतें.. बावरा इस मन को ना, मिलता कभी है शांति.. #अजय57

मज़दूर..

चित्र
जिंदगी तुमनें दिया है दर्द ज़्यादा, देख फिर भी मैं हूं जिंदा यहां.. टूटना सीखा नही किसी हाल में, क्यों कि मैं हूं टूटकर के ही बना.. आशियां अपना नही कोई यहां, यह ज़मी और आसमां अपना ज़हां.. हम ज़मी को जोतकर उपजाते अन्न, पर हमी भूखे और नंगा यहां.. ईंट पत्थर से बनाते घर यहां, पर हमें मिलता नही है छत यहां.. हम नही कभी टूटते किसी हाल में, हम ज़मी से जुड़े है इंसा यहां.. #अजय57

कण-कण में कृष्ण

चित्र
कण कण में जहां कृष्ण बसे है, हर दिल में बसे है राम.! हर पत्थर जहां शिव बन जाता, नदियां होती धाम.! पर्वत पिता सा साहस देता, सागर देता विश्वास.! जन्मभूमि जहां पूजी जाती, भारत होती माँ.! संस्कार जहां पलते फूलते, ऐसा देश महान.! नमन मुझे उस धरती को, जन्म जहां ले बारम्बार.! #अजय57 

गणतंत्र भारत..

चित्र
गणतंत्र है गणतंत्रता का , मान होना चाहिए.. हम वतन आज़ाद है, यह ध्यान होना चाहिए.. मुश्किलों से पाएं है, मिलकर के आज़ादी.. राष्ट्रधर्म एक है, हम एक भारतवासी.. धर्म प्रान्त में बंटे है, फिर भी एक है.. हम वतन आज़ाद है, हम एक देश है.. #अजय57

गणतंत्र भारत...

चित्र
गर्व है, गणतंत्र है, गौरव से, सीना चौड़ा है.. है अक्षुण्ण, यह राष्ट्र मेरा, मान मुझको है.. वीरता की, गीत गाथा, फैली हर दिशा है.. वीरता से पाएं है, हम देश की, आज़ादी.. #अजय57

साईंराम..🙏🌹

चित्र
उम्मीद ही तो थी, जो तुमसे लग गई है.! तुम ही मेरे जीने की, अब आंखरी उम्मीद हो.! छीनना ना आसरा तुम, ना तोड़ना विश्वास.! अब आस लगी है तुमसे, तुम दोगे मेरा साथ.! भटका हुआ कोई भी, आता तेरे शरण मे.! करता मुराद पूरी, सबका तू इस जगत में.! #ॐ_साईंराम #अजय57

हम एक है..

चित्र
आओ मिलकर साथ चलें हम साथ बनाएं मंदिर मस्ज़िद.! मेरा मंदिर तुम बनाओ हम बनाएं मस्ज़िद तेरी.! तुझमें मुझमें फर्क़ नही है फर्क़ नही है रहन-सहन का.! तुम भी इंसां हम भी इंसां हम दोनों है भाई-भाई.! मिलकर के निर्माण करें हम देश तेरा और मेरा है.! देश बढ़ेगा आगे जब, हम दोनों भी आगे बढ़ेंगे.! #अजय57