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ये कैसा इश्क़ है...

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#कैसा_ये_इश्क़_है, सुध-बुध मेरा सब छीन लिया.! नज़रें उनसे क्या चार हुई, मेरा दिल ही मुझसे छीन लिया.! बिन उनके अब नही लगता दिल, रातें मुश्किल से कटती है.! बिन उनके सुना जग सारा, यह इश्क़ बला भी कैसी है.? बस याद उन्ही की रहती है, हम होश गंवाए बैठे है.! मदहोशी का बस आलम है, अब होश में आना मुश्किल है.! कैसा ये इश्क़ है, सुध-बुध मेरा सब छीन लिया.! #अजय57

परिंदा...

उन्मुक्त गगन में उड़ने दो, उड़ने दो इन #परिंदों को.! आज़ाद हुए है पिजड़े से, उड़ान अभी है नई-नई.! अभी वक़्त लगेगा उड़ने में, सिख जाएंगे ये उड़ना फिर.! ज़रा देखो इनकी उड़ान को, नही थकते इनके पर क...

बढ़ती आबादी...

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आबादी ही निगल जाएगी, देश के हर संसाधन को.! अगली पीढ़ी को क्या हम देंगें, सोंच ज़रा इन बातों को.! आबादी हमने ही बढ़ाई, हम ही इसके दोषी है.! अपनी गलती थोप रहें है, आनेवाली पीढ़ी पर.! संसाधन की हाल तो देखो, कैसे इसको लूटा है.! प्रकृति का दोहन करके, चीरहरण कर डाली है.! घोल दी अमृत में विष है, सांस कहां से पाएंगे.! अपने हाथों ही अपने, पैर पे मारी कुल्हाड़ी है.! #अजय57