परिंदा...

उन्मुक्त गगन में उड़ने दो,
उड़ने दो इन #परिंदों को.!

आज़ाद हुए है पिजड़े से,
उड़ान अभी है नई-नई.!

अभी वक़्त लगेगा उड़ने में,
सिख जाएंगे ये उड़ना फिर.!

ज़रा देखो इनकी उड़ान को,
नही थकते इनके पर कभी.!

इन्हें आसमान को छूने में,
नही डिगता इनका लक्ष्य कभी.!

उड़ने दो इन परिंदों को,
नही पिजड़े में अब क़ैद करो.!

#अजय57

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