सावन की फुहार...
सावन में साजन हाथ लगाऊं,
भरी-भरी मेंहदी हाथों में.!
हरी-हरी चूड़ी कांच की पहनूं,
भरी-भरी पहनूं बांहो में.!
धानी चुनर ओढ़ के सजना,
तुझे रिझाऊं सावन मैं.!
खनकाऊं मैं कांच की चूड़ी,
आऊं ना तेरी बांहों में.!
दौड़ के तूने मुझको पकड़ा,
झूला लिया मुझे बांहों में.!
अंग से अंग लगा के सजना,
भीगा दिया मुझे सावन में.!
#अजय57

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