वक़्त पर कटाक्ष कर गुज़र रहा जो समाज पर.! तू क़लम आज़ाद है लिख तो इस समाज पर.! जो गलत है दिख रहा, उस पर तू विचार कर.! शब्दों में पिरो के तीर, दुश्मनों पर वार कर.! तू कलम आज़ाद है, लिख तो इस समाज पर.! शब्द से जुड़ेंगे शब्द, काफ़िला बन जाएगा.! तब समाज में नया, आएगा बदलाव तब.! तू कलम आज़ाद है, लिख तो इस समाज पर.! #अजय57
#इश्क़_की_कहानी बन जाती है कहानियाँ.. मिलते है दिल दो जवां फिर इश्क़ शुरू हो जाती है.. नज़रों से मिलती है नज़रें नज़रें कुछ-कुछ कहती है.. पलकें झुकी तो समझो प्यार नही तो पकड़ो अपनी राह.. इज़हार इश्क़ इक़रार इश्क़ यह इश्क़ बड़ा कमीना है.. सुख चैन सभी छीन लेता है और दर्द का दरिया देता है.. #अजय57
जिंदगी तुमनें दिया है दर्द ज़्यादा, देख फिर भी मैं हूं जिंदा यहां.. टूटना सीखा नही किसी हाल में, क्यों कि मैं हूं टूटकर के ही बना.. आशियां अपना नही कोई यहां, यह ज़मी और आसमां अपना ज़हां.. हम ज़मी को जोतकर उपजाते अन्न, पर हमी भूखे और नंगा यहां.. ईंट पत्थर से बनाते घर यहां, पर हमें मिलता नही है छत यहां.. हम नही कभी टूटते किसी हाल में, हम ज़मी से जुड़े है इंसा यहां.. #अजय57
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