हमसाया..

अजनबी सा चेहरा तेरा,
लगता क्यों अपना सा है.!
कौन हो तुम क्या नाम है तेरा,
जानने को दिल करता है.!
साया जैसे साथ चल रही,
कौन हो तुम बतलाओ ना.!
अज़नबी अब भी रहना या,
हम_साया बन जाना है.!
हम मिले है साथ चलें है,
जीवन पथ पर साथ-साथ,
अनजाने राहों के हम-तुम,
हमराही बन गए है.!
#अजय57

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