महक

महक उठे वो पन्ने फिर से,
खोला जब किताब को..
वर्षों पहले रखा गुलाब था,
उसने दी थी प्यार से..
इश्क़ मेरा था पहला-पहला,
पहला वो ही प्यार है..
भूल न पाए आज भी उनको,
हर लमहें वो याद है..
गीत गज़ल और शेरों शायरी,
उनकी ही पहचान है..
उसकी याद में दिन गुज़रते,
गुजरती अब हर रात है..
#अजय57 

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